21 अप्रैल 2013 - 19:09
सऊदी अरब जो तलवार सीरिया के लिए तेज़ कर रहा है उसका निशाना ख़ुद बनेगा।

आले सऊद सरकार की ओर से सीरिया में बश्शार असद हुकूमत के खिलाफ सक्रिय अलकायदा से जुड़े संगठनों का समर्थन, उनकी वित्तीय और सैन्य हिमायत तथा उनके पक्ष में प्रचार अभियान ऐसी सच्चाई है कि जिसका इंकार नहीं किया जा सकता है और मौजूदा समय में इंटर-नेशनल एक्सपर्ट उस पर पूरी तरह से नज़र रखे हुये हैं.....

आले सऊद सरकार की ओर से सीरिया में बश्शार असद हुकूमत के खिलाफ सक्रिय अलकायदा से जुड़े संगठनों का समर्थन, उनकी वित्तीय और सैन्य हिमायत तथा उनके पक्ष में प्रचार अभियान ऐसी सच्चाई है कि जिसका इंकार नहीं किया जा सकता है और मौजूदा समय में इंटर-नेशनल एक्सपर्ट उस पर पूरी तरह से नज़र रखे हुये हैं। इंटर-नेशनल मामलों में सक्रिय बहुत से विश्लेषक इस नतीजे तक पहुँच चुके हैं कि सऊदी अरब एक खतरनाक खेल, खेल रहा है।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब सरकारी और ग़ैर सरकारी दोनों लिहाज से चरमपंथी समूहों की सारी आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है। सीरिया में हिंसा की शुरुआत से ही यह सिलसिला शुरू हो गया था और अब कुछ समय से इसमें और तेज़ी आई है।
यह बिल्कुल सामने की बात है कि अल-क़ायदा से जुड़े जिबहतुन नसरा नामक आतंकी संगठन ही वास्तव में सीरिया सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाले है, दूसरी ओर सऊदी अरब मीडिया खासकर अल-अरबियह समाचार चैनल चरमपंथियों का पूरा समर्थन करता है और सरकार के साथ बातचीत खारिज करते हुए लीबिया से गद्दाफी के पतन जैसे तरीके पर सीरिया के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप और नैटो कार्यवाही को ही सीरियाई जनता का समर्थन और देश में पैदा हुए संकट का एकमात्र हल मानता है।
हक़ीक़त यह है कि ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद जिन चरमपंथी संगठनों के ख़िलाफ़ सख़्त जासूसी और फ़ौजी कार्यवाहियां अमल में लाई गई थी वह अब सऊदी अरब और गुप्त रूप से की जा रही अमेरिका की हिमायत से सीरिया में इकट्ठा होकर अपने ठिकाने बना रहे हैं। यह मामला इस लिहाज से ज्यादा सोचने लाएक है कि अगर जिबहतुन नसरह असद सरकार के खिलाफ अपनी कार्यवाहियों में कामयाब हो जाती है तो सीरिया अलकायदा से जुड़े आतंकवादियों की जन्नत बन जाएगा।
सऊदी अरब की ओर से इस तरह के संगठनों के समर्थन से आले सऊद शासकों को कुछ समय के लिए उनकी मर्जी के हिसाब से नतीजे हासिल हो सकते हैं, जबकि हाल के दिनों में उन्हें इस हद तक भी कामयाबी नहीं मिली है और असद हुकूमत हर तरह के हमले का डटकर मुकाबला कर रही है, हालांकि उनकी इस डिफ़ेंस कार्यवाही का नतीजा सऊदी अरब के लिए एक ऐतिहासिक घटना साबित होगा इसलिए कि उक्त संगठनों का मेन मक़सद हेजाज़ की ज़मीन को आले सऊद के कब्जे से आज़ाद कराना है।
इसी सिलसिले में आतंकवादी अल-कायदा नेटवर्क के सरगना ऐमन अल जवाहिरी ने असद हुकूमत से लड़ रहे सीरियाईयों से कहा है कि 'खिलाफत को पलटाने' के रूप में सीरिया में इस्लामी सरकार की स्थापना करें। इंटरनेट पर प्रकाशित अपने संदेश में जवाहरी अपने मानने वालों को अमेरिकी षड्यंत्र, अरब देशों, सीरिया में संयुक्त राष्ट्र के राजदूत अखज़र इब्राहीमी और अरब लीग के प्रमुख नबील अरबी से जो उसके अनुसार हमलावरों के बलिदानों को चुराना चाहते हैं, सावधान रहने को कहा है।
इस बात से यह बिल्कुल साफ़ हो जाता है कि हालांकि फिलहाल इन आतंकवादी संगठनों ने असद सरकार के खिलाफ सऊदी अरब से हाथ मिला लिया है लेकिन उनका अस्ली मकसद सीरिया को अपना सुरक्षित ठिकाना बना कर अपने करीबी दुश्मन यानी आले सऊद और दूर के दुश्मन यानी अमेरिका के खिलाफ मोर्चा संभालना है। सीरिया में सफलता की सूरत में अल-कायदा का अगला लक्ष्य सऊदी अरब की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना होगा, जिसकी पिछली मिसालें मौजूद हैं, पिछले दशक में अल-कायदा, सऊदी अरब में कई खूनी कार्यवाहियां कर चुकी है।
खुद अमेरिका भी इसी तरह के अनुभव से गुजर चुका है। अफगानिस्तान में सोवियत संघ के प्रभाव को रोकने के लिए व्हाइट हाउस ने तालिबान का आविष्कार किया जिसने बाद में ऐसा भयानक रूप धारण कर लिया कि जिसके पंजों से अमेरिका का चेहरा भी नहीं बच सका।
ऐसा लगता है कि आले सऊद अधिकारियों की आज की रणनीतिक गलती जल्द ही उन्हें अपने ही खोदे गड्ढे में डाल देगी। दरअसल सऊदी अरब आज जो तलवार सीरिया के खिलाफ तेज़ कर रहा है वह कल उसी का सीना चीर डालेगी।